बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

आँसू

आँसू:-
रूक-रुक क्यों ? 😢 तू ढ़लकता ?
बहता जा तू अविरल रे।
अविराम अनन्त सुख दु:ख में,
मिटता जा घुल 'शैलज' कण में।
अरूणाभ कपोलों से गिर-गिर रे,
टूटे न हृदय औ मन रे।
इसलिए, सुनो ! मेरे सुन्दरतम्।
बहता जा तू अविरल रे।
:- प्रो० अवधेश कुमार 'शैलज',पचम्बा, बेगूसराय।

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