बुधवार, 1 फ़रवरी 2017

सरस्वती वंदना

सरस्वती वन्दना:-
सर्वं त्वेष त्वदीयं माँ,  नमस्तुभ्यम् भारती।।
ऊँ गल ग्रह नाशिनी, गहन तथ्य प्रकाशिनी।
गन्धर्व, वेद, घनाक्षरी प्रिया,गान्धार स्वरानुमोदिनी।।
गुण गण गीति प्रदायिनी, गुप्त रत्न दायिनी।
गुप्त तथ्य प्रकाशिनी, प्रज्ञा चक्षु प्रदायिनी।।
गो,गिरा,ग्राम,स्वामिनी, गति-मति प्रदायिनी।
सर्वं त्वेष् त्वदीयं माँ ,नमस्तुभ्यम् भारती।।
अज-जाया, जिगीषा प्रदायिनी;
जुगुप्सा,अज्ञान विनाशिनी।
तदाकार, तदगुण, तद्धित मह,
तन्मात्री तमोगुण नाशिनी।।
तपत्रय, तारक, तालव्य तारिका,
तुक, तुकान्त, तुरीय, तुष्टि,तुहिन कारिणी।
सर्वं त्वेष् त्वदीयं माँ ,नमस्तुभ्यम् भारती।।
दनुज, दस्यु, दंभिक दर्प विनाशिनी।
दीक्षा-गुरु, दीनबन्धु, दु:ख नाशिनी।।
सर्वं त्वेष् त्वदीयं माँ, नमस्तुभ्यम् भारती।।
      (क्रमश:)
:- प्रो०अवधेश कुमार 'शैलज',
पचम्बा, बेगूसराय।

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