संविधान किसी प्राणी, पदार्थ या विचार धारा के व्यक्तिगत, सामूहिक और / या सार्वजनिक हित में गठित किसी संगठन या राज्य के संचालन प्रक्रिया को परिभाषित करने वाला सार्वभौमिक चिन्तन सम्पन्न; अतीत, वर्त्तमान एवं भविष्य के सन्दर्भों पर आधारित एवं अनुमानित दृष्टिकोण से सुरक्षित; बहुआयामी, रचनात्मक, विकासात्मक एवं उपयोगी; वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक; लौकिक एवं पारलौकिक हित साधक; सम्यक्, मौलिक एवं सारगर्भित प्रकृति वाला; लिखित, अलिखित या प्राकृतिक स्वरूप वाला; सहज, सर्व स्वीकृत एवं आत्मानुशासन प्रेरक; निष्पक्ष, पूर्वाग्रह रहित एवं तथ्यात्मक; सुव्यवस्थित, समदर्शी एवं समता मूलक; व्यवहारिक, सामञ्जस्य कारक एवं सद्भावना वर्धक एक सोद्देश्य, आदर्श एवं अपेक्षाकृत अपरिवर्त्तनशील विधान होता है, जिसमें उनके अस्तित्व एवं अस्मिता की सुरक्षा निहित रहती है।
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Definition and principles of the Constitution :-
A constitution is a universally thoughtful framework that defines the operational process of an organization or state, formed in the individual, collective, and/or public interest of any being, entity, or ideology; secured by a perspective based on and informed by past, present, and future contexts; multidimensional, creative, developmental, and useful; scientific and practical; serving both worldly and transcendental interests; of a balanced, fundamental, and substantive nature; written, unwritten, or natural in form; spontaneous, universally accepted, and conducive to self-discipline; impartial, unbiased, and factual; well-organized, equitable, and egalitarian; practical, harmonizing, and promoting goodwill; a purposeful, ideal, and relatively unchangeable law in which the security of their existence and identity is inherent.
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संविधानस्य परिभाषा सिद्धान्ताः च :-
संविधानं एकः उद्देश्यपूर्णः, आदर्शः, तुल्यकालिकरूपेण च अपरिवर्तनीयः विधानः अस्ति यः कस्यापि जीवस्य, पदार्थस्य वा विचारधारायाः व्यक्तिगत, सामूहिक तथा/वा जनहिताय निर्मितस्य कस्यापि संस्थायाः वा राज्यस्य वा कार्यं परिभाषयति भूत-वर्तमान-भविष्य-सन्दर्भेषु आधारितं प्रक्षेपितदृष्टिकोणात् च रक्षितम्; बहुआयामी, रचनात्मकः, विकासात्मकः, उपयोगी च; वैज्ञानिकं व्यावहारिकं च; लौकिक-आध्यात्मिक-हितानाम् सेवां कुर्वन्; सम्यक्, मौलिकः, सारभूतः च स्वभावः भवति; लिखितं, अलिखितं वा प्राकृतिकं रूपं वा; सरलं, सर्वस्वीकृतं प्रेरणादायकं च आत्म-अनुशासनम्; निष्पक्षः, निष्पक्षः, तथ्यात्मकः च; सुसंगठितः, निष्पक्षः, समतावादी च; व्यावहारिकं, सामञ्जस्यं, सद्भावनावर्धनं च; उद्देश्यपूर्णं, आदर्शं, तुल्यकालिकं अपरिवर्तनीयं च विधानं भवति, यस्मिन् तेषां अस्तित्वस्य, तादात्म्यस्य च रक्षणं निहितम् अस्ति ।
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